back
CTIZAN AD

कविता : मेरी बेटी के पैदा होने का साल

वि.सं.२०७६ असोज ११ शनिवार

831 

shares

आज जिस लड़की से
फोन पर मेरी बातें हुईं
बिल्कुल मेरी बेटी जैसी थी
उतनी ही होती उम्र मेरी बेटी की भी
लगभग उसी वक्त उसे पैदा होना था
पर ये सारा किस्सा एक अजब तूफान का है
जिसने रोक दी सृष्टि की गति
जिसने की ऐसी वृष्टि
कि असंभव हो गया
कहीं भी बसना
जिÞन्दगी दहती रही जैसे बाँस के बने फट्ठे पर
बहती रही जाने किन बारिशों की नावों में
और मेरी बेटी जिसे लगभग
उसी वक्त पैदा होना था
खोई रही जाने किन बदलियों
बिजलियों में
चमकती रही बनकर सूरज की रौशनी
मेरे बेहद उदास दिनों पर
मेरे गीले हो गए अंतर पर
भींग गए मन आँगन पर
दमकती रही वह बनकर मेरे अक्षरों की आवाज
धुन भी उनकी, उनकी चमक
मेरी बेटी
जिसका नाम मैंने बदला
इस बीच हजारौं बार
उसकी आवाज हर उस बच्चे की आवाज बनकर
आती रही
जो पैदा हुआ था उस साल
जिस साल मेरी बेटी को भी पैदा होना था
लेकिन, जिस साल
मेरे प्रेमी ने शुरू की थी
भयानक राजनीती….

पंखुरी सिन्हा Phase 3,
वी सी लेन, क्लब रोड,
मुजफ्फरपुर बिहार

वि.सं.२०७६ असोज ११ शनिवार १०:५७ मा प्रकाशित

कवि दाहालको “महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा” महाकाव्य लोकार्पण

कवि दाहालको “महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा” महाकाव्य लोकार्पण

काठमाडौँ । कवि कलानिधि दाहालको महाकाव्य “महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा” को...

कवि अस्तित्वको कविता सङ्ग्रह ’चिहानमाथि महल बनाइरहेको मान्छे’ माथि समीक्षा

कवि अस्तित्वको कविता सङ्ग्रह ’चिहानमाथि महल बनाइरहेको मान्छे’ माथि समीक्षा

दाङ । राप्ती साहित्य परिषद् जिल्ला शाखा दाङको आयोजनामा कवि...

चारु

चारु

दिपक पनेरु,ईश्वरपुर ४, सर्लाही छुटेपछि दिल मेरो घायल भएछ तिम्रो...

झिल्का कविता

झिल्का कविता

शिवहरि खनाल,धादिङ १. सुखकाे आधार शान्ति शान्तिबाटै आउने हाे हाम्राे...

कविता : छोटा भाइ इन्डिया

कविता : छोटा भाइ इन्डिया

हिरा भट्ट 'बदमास नम्बर दुई' पञ्चेश्वर-६, बैतडी छोटा भाइ पडोसका...

सुसेली : पानी

सुसेली : पानी

प्रमाेद नेपाल,काठमाडौँ (१) बुझ्दछ ज्ञानी झर्छ तल बादल बाेकेर पानी...