आज जिस लड़की से
फोन पर मेरी बातें हुईं
बिल्कुल मेरी बेटी जैसी थी
उतनी ही होती उम्र मेरी बेटी की भी
लगभग उसी वक्त उसे पैदा होना था
पर ये सारा किस्सा एक अजब तूफान का है
जिसने रोक दी सृष्टि की गति
जिसने की ऐसी वृष्टि
कि असंभव हो गया
कहीं भी बसना
जिÞन्दगी दहती रही जैसे बाँस के बने फट्ठे पर
बहती रही जाने किन बारिशों की नावों में
और मेरी बेटी जिसे लगभग
उसी वक्त पैदा होना था
खोई रही जाने किन बदलियों
बिजलियों में
चमकती रही बनकर सूरज की रौशनी
मेरे बेहद उदास दिनों पर
मेरे गीले हो गए अंतर पर
भींग गए मन आँगन पर
दमकती रही वह बनकर मेरे अक्षरों की आवाज
धुन भी उनकी, उनकी चमक
मेरी बेटी
जिसका नाम मैंने बदला
इस बीच हजारौं बार
उसकी आवाज हर उस बच्चे की आवाज बनकर
आती रही
जो पैदा हुआ था उस साल
जिस साल मेरी बेटी को भी पैदा होना था
लेकिन, जिस साल
मेरे प्रेमी ने शुरू की थी
भयानक राजनीती….
पंखुरी सिन्हा Phase 3,
वी सी लेन, क्लब रोड,
मुजफ्फरपुर बिहार
वि.सं.२०७६ असोज ११ शनिवार १०:५७ मा प्रकाशित



























