हमर सुन्नर गाम छै
फरल ओतै आम छै
विपतिमे संसार यौ
प्रकृति जेना बाम छै
निकलि बाहर जाउ नै
बिमारी सब ठाम छै
सफा आ स्वस्थ्य रहब
तखन कोनो काम छै
जनककें सन्तान हम
जनकपुर सन धाम छै
अयोध्या छै घर जकर
तकर नाओ राम छै
कलम किनि दिअ ने लिखब
बहुत सस्ता दाम छै
बहरे हजज मुरब्बा अस्तर
कुन्दन कुमार कर्ण,राजविराज
वि.सं.२०७७ जेठ ३१ शनिवार १०:११ मा प्रकाशित






























