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चारु ( हिन्दी )

वि.सं.२०८३ असार ६ शनिवार

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पी एस यादव ‘अजनबी’,भारत

गुनाह तो कर बैठे अब कोई सजा भी दे दो।
कट जाए वो पल ऐसा जीने का मजा भी दे दो।

हटती नहीं इन यादों से चाहतों की खुमारी,
मिल जाए सुकून वो महकती रजा भी दे दो।

चैन से तुम मगर हमको निशा सताती है,
हमारे मुस्कुराने की तुम कोई बजा भी दे दो।

कैसे खामखां हो नाराज ऐ मेरे हमसफर,
बहते हुए इन अश्कों को एक अजा भी दे दो।

हर पल में छुपे हुए बस तुम्हारे ही ख्वाब,
भूल जाएं अतीत भूलने की लजा भी दे दो।

जब मुजरिम हैं तो कोई फैसला भी सुनाओ,
गुनहगारियों से मुक्ति के लिए ध्वजा भी दे दो।

हैरत-ज़दा हूँ तुम्हारी अदाओं से ऐ सनम,
पास ना सही ठीक से मरने की कजा भी दे दो।

अक्षर सङ्ख्या : १७
अनुप्रास : अजा
शेष अनुप्रास : भी दे दो

वि.सं.२०८३ असार ६ शनिवार ०५:१७ मा प्रकाशित

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