back
CTIZAN AD

मैथिली गजल

वि.सं.२०७७ जेठ १७ शनिवार

1K 

shares

एखन हारल नै छी खेल जितनाइ बांकी छै
इतिहासक पन्नामे नाम लिखनाइ बांकी छै

गन्तव्यक पथ पर उठलै पहिल डेग सम्हारल
अन्तिम फल धरि रथ जिनगीक घिचनाइ बांकी छै

विद्वानक अखड़ाहामे करैत प्रतिस्पर्धा
बनि लोकप्रिय लोकक बीच टिकनाइ बांकी छै

लागल हेतै कर्मक बाट पर ठेस नै ककरा
संघर्षक यात्रामे नोर पिबनाइ बांकी छै

माए मिथिला नै रहितै तँ के जानितै सगरो
ऋण माएके सेवा करि कऽ तिरनाइ बांकी छै

सब इच्छा आकांक्षा एक दिन छोडिकेँ कुन्दन
अन्तर मोनक परमात्मासँ मिलनाइ बांकी छै

मुस्तफ्फैलुन-फाईलातु-मफ्ऊलु-फैलुन

वि.सं.२०७७ जेठ १७ शनिवार ०८:४३ मा प्रकाशित

मनोपरामर्शकर्ताको आँखाबाट नाटक ‘केसामी नाम्सामी’

मनोपरामर्शकर्ताको आँखाबाट नाटक ‘केसामी नाम्सामी’

कुनै-कुनै नाटकहरु यस्तो हृदयस्पर्शी र जिवन्त अनुभव गराउने किसिमका हुन्छन्,...

समस्यापूर्ति : स्नेहले हँसाउने, बुबामुमा सुखी रहून् ॥

समस्यापूर्ति : स्नेहले हँसाउने, बुबामुमा सुखी रहून् ॥

कृष्णप्रसाद पौडेल 'जस्ताधरे' विदुर -४, बट्टार, नुवाकोट कर्ममा रमाउँदै विचारले...

साउन विशेष झिल्का कविताहरू

साउन विशेष झिल्का कविताहरू

वसन्त अनुभव, वसन्तविहार १ रिमझिम झरी पर्‍यो भयो हरियाली चारैतिर...

चारु

चारु

लक्ष्मी दास शर्मा टासिछोलिङ, साम्ची, भुटान मकैको घोगा धानको बाला...

सुसेली : इन्द्रेणी

सुसेली : इन्द्रेणी

समृद्धि के.सी. ग्रीनहिल स्कुल फर्पिङ,कक्षा ६ आकाशै माथि सातै रङ्ग...

गजल

गजल

अरुण खड्का, कीर्तिपुर , काठमाडौँ दिल निकै पग्लियो के भयो...